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नियद नेल्लानार के 10 दुर्गम गांवों में आज़ादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा

स्थान – सुकमा (छत्तीसगढ़)
संवाददाता – उइका नरेश

नक्सल प्रभावित इलाकों में लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत, गणतंत्र दिवस 2026 बना स्वर्णिम अध्याय

सुकमा। बस्तर की सुदूर पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे वे गांव, जहाँ वर्षों तक भय, नक्सल आतंक और असुरक्षा का माहौल रहा, आज इतिहास के साक्षी बने। नियद नेल्लानार क्षेत्र के 10 अति-संवेदनशील गांवों में आज़ादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया, और पहली बार गणतंत्र दिवस का भव्य आयोजन किया गया।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और गृहमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संभव हो सकी है। दशकों तक विकास और शासन से कटे रहे इन गांवों में आज राष्ट्रगान की गूंज, भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों ने एक नए युग की शुरुआत का संदेश दिया।

इन 10 गांवों में पहली बार मना गणतंत्र दिवस

नियद नेल्लानार क्षेत्र के तुमालभट्टी, वीरागंगलेर, मैता, पालागुड़ा, गुंडाराजगुंडेम, नागाराम, वंजलवाही, गोगुंडा, पेदाबोडकेल और उरसांगल जैसे दुर्गम और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव में रहे गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किया गया

गांवों में सुरक्षा बलों की सतत तैनाती, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और प्रशासन की सक्रिय उपस्थिति ने ग्रामीणों को वर्षों के भय से मुक्त होने का साहस दिया। अब ये गांव धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

विकास, विश्वास और सुरक्षा का त्रिवेणी संगम

कलेक्टर श्री अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण की सक्रिय भूमिका से इन दूरस्थ इलाकों में प्रशासन की सशक्त पहुँच सुनिश्चित हुई है।
ध्वजारोहण के दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों ने गर्व के साथ तिरंगे को सलामी दी। बच्चों की आंखों में चमक और बुजुर्गों के चेहरे पर संतोष इस बात का प्रमाण है कि अब इन गांवों में सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जगी है।

ग्रामीणों ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि पहली बार उन्होंने खुलेआम राष्ट्रीय पर्व मनाया और देश के साथ अपनी पहचान को महसूस किया।

सुरक्षा बल बने ग्रामीणों के मित्र

सुरक्षा कैंपों की स्थापना से न केवल क्षेत्र में शांति बहाल हुई है, बल्कि जवान ग्रामीणों के मित्र बनकर उनके जीवन में भरोसा और सुरक्षा की भावना पैदा कर रहे हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन, सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं के विस्तार से अब इन गांवों में विकास की नई रोशनी पहुंच रही है।

एसपी किरण चव्हाण का बयान

पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण ने कहा कि —

“यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि सुकमा के अंतिम छोर तक लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का प्रतीक है। हमारा लक्ष्य ‘विकास, विश्वास और सुरक्षा’ के मंत्र के साथ बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करना है।”

‘पूना मार्गेम’ — सुकमा का नया रास्ता

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘पूना मार्गेम’ (गोंडी भाषा में अर्थ — नया रास्ता) अब ज़मीन पर साकार होती दिख रही है।
अब बस्तर के वनांचलों में बंदूक की गूंज नहीं, बल्कि शिक्षा, विकास और शांति की लहर दौड़ रही है।

इतिहास में दर्ज हुआ गणतंत्र दिवस 2026

गणतंत्र दिवस 2026 सुकमा और बस्तर के लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नक्सलवाद पर लोकतंत्र की निर्णायक जीत और नए सुकमा के निर्माण की शुरुआत के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया है।

यह आयोजन आने वाले समय में विकास, शांति और आत्मनिर्भरता की दिशा में बस्तर के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।


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