एंबुलेंस नहीं मिली, ग्रामीणों ने कावड़ में लादकर पहुंचाया मरीज अस्पताल
सुकमा/
जिले के विकास और नक्सलवाद के खात्मे के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। सुकमा जिले की पंचायत कोंडासावंली अंतर्गत आश्रित गांव कर्रेपारा के निवासी कुंजाम हुर्रा द्वारा किसी कारणवश जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया गया, जिससे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
जहर सेवन के बाद कुंजाम हुर्रा को लगातार उल्टी, पेट दर्द और दस्त की गंभीर समस्या शुरू हो गई। मरीज की हालत बिगड़ती देख परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन क्षेत्र में 108 एंबुलेंस या अन्य स्वास्थ्य परिवहन सेवा उपलब्ध नहीं हो पाई।
मजबूरी में परिजन और ग्रामीण मरीज को कावड़ में लादकर पंचायत मुख्यालय स्थित स्वास्थ्य केंद्र तक लेकर पहुंचे। रास्ते की दुर्गमता और मरीज की गंभीर स्थिति ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी। पंचायत स्तर पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे सुकमा जिला अस्पताल के लिए तत्काल रेफर कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में उप-स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद आपातकालीन एंबुलेंस सेवा समय पर नहीं मिलती, जिसके चलते उन्हें आज भी मरीजों को कंधों या कावड़ में ढोकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपात स्थिति में समय पर वाहन और चिकित्सा सुविधा न मिलना बेहद चिंताजनक है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रशासन द्वारा नक्सलवाद के अंतिम चरणों में होने और विकास के तेज़ी से पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन कर्रेपारा जैसी दूरस्थ बस्तियों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी साफ नजर आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं के अभाव में मरीजों को जान जोखिम में डालकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दूरस्थ गांवों में एंबुलेंस सेवा, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं और त्वरित मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान केवल सुविधा के अभाव में न जाए।
प्रशासन की ओर से मामले में आवश्यक कार्रवाई और जांच की बात कही जा रही है, वहीं ग्रामीण अब ठोस और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।











