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बस्तर का बेटा राजेश यालम पहुँचा देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIM रायपुर

संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल बना आदिवासी युवा

बीजापुर/रायपुर।
बस्तर अंचल के बीजापुर जिले के अंदरूनी आदिवासी क्षेत्र से निकलकर एक युवा ने वह उपलब्धि हासिल की है, जो पूरे बस्तर के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बन गई है। आदिवासी युवा राजेश यालम ने देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में चयनित होकर प्रबंधन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बस्तर जैसे दूरस्थ अंचल के युवाओं के लिए आशा और आत्मविश्वास का संदेश भी है।

राजेश यालम ने यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियाँ भी मजबूत संकल्प के सामने बाधा नहीं बन सकतीं। आज वे बस्तर के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं।

उद्यमिता में भी बना चुके हैं पहचान

राजेश यालम केवल एक प्रशिक्षणार्थी ही नहीं, बल्कि एक सफल युवा उद्यमी भी हैं। वे “आमचो बस्तर ढाबा एवं रेस्टोरेंट व कैटरिंग” के संस्थापक (Founder) हैं, जिसने स्थानीय स्तर पर पहचान बनाई है। इसके साथ ही वे हनी बी फार्मिंग (शहद उत्पादन) के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं और आदिवासी अंचल के संसाधनों को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

बीजापुर के जंगलों से IIM रायपुर तक का सफर

राजेश यालम ने बताया कि बीजापुर जैसे अंदरूनी और संसाधनविहीन आदिवासी क्षेत्र से निकलकर IIM रायपुर जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में चयन होना उनके जीवन का सबसे गर्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की है।

उन्होंने कहा,
“अगर मन में यह विश्वास हो कि मैं भी कर सकता हूँ, तो कोई भी मंज़िल असंभव नहीं होती।”

IIM रायपुर में आधुनिक बिजनेस और AI पर प्रशिक्षण

IIM रायपुर में आयोजित इस विशेष प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आधुनिक बिजनेस मॉडल, मार्केटिंग स्ट्रेटेजी, ब्रांडिंग, विज्ञापन, मार्केट वैल्यू एनालिसिस, रिसर्च, नई तकनीकें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस तरह के कार्यक्रमों में आमतौर पर देश के बड़े उद्योग समूहों से जुड़े लोग लाखों रुपये खर्च कर हिस्सा लेते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बस्तर के आदिवासी युवा की भागीदारी को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

देश के दिग्गज भी ले चुके हैं ऐसे संस्थानों से प्रशिक्षण

राजेश यालम ने बताया कि देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी अपने जीवन में ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे संस्थान में प्रशिक्षण का अवसर मिलना उनके लिए सपने के साकार होने जैसा है।

MSME ST-SC HUB और DICCI का आभार

राजेश यालम ने इस उपलब्धि के लिए MSME ST-SC HUB और DICCI (Dalit Indian Chamber of Commerce & Industry) का आभार व्यक्त किया। इन्हीं संस्थाओं के सहयोग से उन्हें इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला।

इस प्रशिक्षण में देशभर से IT, रियल एस्टेट, टेक्सटाइल, AI और अन्य क्षेत्रों से जुड़े CEO और उद्यमी शामिल हैं। दिल्ली, बेंगलुरु, महाराष्ट्र, गुजरात, भोपाल सहित छत्तीसगढ़ और बस्तर से भी प्रतिभागी इसमें भाग ले रहे हैं।

बस्तर के युवाओं के लिए संदेश

राजेश यालम ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में कई आदिवासी युवा व्यापार शुरू तो करते हैं, लेकिन तकनीकी ज्ञान, मार्केटिंग और सही मार्गदर्शन के अभाव में उनका व्यवसाय आगे नहीं बढ़ पाता। यदि ऐसे युवाओं को IIM जैसे संस्थानों में प्रशिक्षण मिले, तो वे अपने व्यवसाय को जिला स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा सकते हैं।

सब्सिडी में मिली महंगी ट्रेनिंग

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 दिवसीय है, जिसकी वास्तविक फीस 1 से 2 लाख रुपये तक होती है, लेकिन केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से यह प्रशिक्षण न्यूनतम सब्सिडी पर उपलब्ध कराया गया है। इसके लिए राजेश यालम ने सरकार का आभार व्यक्त किया।

बस्तर के उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प

राजेश यालम ने कहा कि उनका लक्ष्य बस्तर में बनने वाले उत्पादों और यहां के उद्यमों को देश-दुनिया तक पहचान दिलाना है। वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक आदिवासी युवा आत्मनिर्भर बनें और बस्तर की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित हो।

राजेश यालम की यह सफलता कहानी यह संदेश देती है कि संघर्ष, सही दिशा और आत्मविश्वास से बस्तर का युवा भी देश के शीर्ष संस्थानों तक पहुँच सकता है।