बीजापुर जिले के ग्राम कुचनूर में प्रस्तावित कोरंडम खदान को दी गई पर्यावरण स्वीकृति को लेकर बीजापुर विधायक श्री विक्रम मंडावी ने गंभीर आपत्ति जताई है। भोपालपटनम में आयोजित एक प्रेस वार्ता में विधायक मंडावी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार और केंद्र में भाजपा की मोदी सरकार ने मिलकर आदिवासी बहुल क्षेत्र बीजापुर जिले के ग्राम कुचनूर (तहसील भोपालपटनम) में खसरा नंबर 826, रकबा 3.70 हेक्टेयर में स्थित कोरंडम खदान के लिए छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) को वार्षिक 1.0 टन उत्पादन क्षमता की पर्यावरण स्वीकृति प्रदान कर दी है। 
विधायक विक्रम मंडावी ने इस स्वीकृति को जनता, आदिवासियों के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए इसे बेहद चिंताजनक निर्णय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह स्वीकृति राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण द्वारा जारी की गई है, लेकिन इससे पूर्व न तो ग्राम सभा से कोई अनुमति ली गई और न ही जनसुनवाई की प्रक्रिया अपनाई गई, जो कि कानूनन अनिवार्य है।

विधायक मंडावी ने आरोप लगाया कि पेसा अधिनियम (PESA), पंचायत राज अधिनियम एवं वन अधिकार अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के तहत किसी भी प्रकार के खनन या विकास कार्य से पहले ग्राम सभा की अनुमति आवश्यक है, लेकिन कुचनूर कोरंडम खदान के मामले में ग्राम पंचायत और स्थानीय ग्रामीणों को अंधेरे में रखकर पर्यावरण स्वीकृति दे दी गई। 
प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर ग्राम सभाओं की भूमिका को कमजोर कर रही है, ताकि बड़े कॉर्पोरेट और औद्योगिक हितों को लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि बीजापुर जिला आदिवासी बहुल होने के साथ-साथ अबूझमाड़ क्षेत्र से लगा हुआ है, जहां के लोग पूरी तरह से जंगल, जमीन और पानी पर निर्भर हैं। लेकिन डबल इंजन की भाजपा सरकार विकास के नाम पर बस्तर के आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन से बेदखल करने का षड्यंत्र कर रही है

विधायक मंडावी ने कहा कि यह केवल एक खदान का मामला नहीं है, बल्कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, स्वशासन और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों का सवाल है। यदि इसी तरह बिना सहमति और संवाद के फैसले लिए जाते रहे, तो इसका गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय दुष्परिणाम होगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कुचनूर कोरंडम खदान को दी गई पर्यावरण स्वीकृति को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही ग्राम सभा की बैठक आयोजित कर ग्रामीणों की सहमति ली जाए और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी ढंग से दोबारा शुरू किया जाए, जिसमें जनसुनवाई अनिवार्य हो। विधायक मंडावी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने आदिवासियों के अधिकारों का सम्मान नहीं किया, तो आने वाले समय में बस्तर संभाग में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। 
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री बसंत राव ताटी, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष भोपालपटनम श्री कामेश्वर गौतम, वल्वा मदनैया, रमेश पामभोई, अरुण वासम, मिच्चा सम्मैया, विजार खान, चलपत उद्दे, नरेन्द्र मट्टी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।













