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नए कानून से ग्राम सभाओं के अधिकार होंगे समाप्त — कांग्रेस का आरोप

भाजपा और मोदी सरकार ग्राम पंचायतों की शक्तियां ठेकेदारों को सौंप रही है — विमल सुराना

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार दंतेवाड़ा जिले के पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को जिला मुख्यालय बीजापुर में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार पर ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के अधिकार समाप्त करने का गंभीर आरोप लगाया।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता विमल सुराना ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा से जुड़े नए कानून और बदलावों के माध्यम से ग्राम पंचायतों की संवैधानिक शक्तियां छीनी जा रही हैं और ठेकेदारों को सौंपी जा रही हैं, जिससे ग्रामीण स्वशासन की मूल भावना को गहरा आघात पहुंच रहा है।

मनरेगा अब अधिकार नहीं, सरकार की मर्जी की “रेवड़ी” बनेगा — सुराना

विमल सुराना ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। किसी भी ग्राम पंचायत में काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर रोजगार देना अनिवार्य था। लेकिन मोदी सरकार के नए बदलावों के बाद अब यह अधिकार समाप्त कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अब मनरेगा सरकार की इच्छा पर निर्भर योजना बनकर रह जाएगी, जिसमें यह केंद्र सरकार तय करेगी कि किस ग्राम पंचायत को काम मिलेगा और किसे नहीं इससे मनरेगा का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

न्यूनतम मजदूरी और सालभर काम की गारंटी भी खत्म

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के तहत तय न्यूनतम मजदूरी दी जाती थी, जिसमें हर साल बढ़ोतरी होती थी और जरूरत पड़ने पर साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था। लेकिन अब नए नियमों के तहत न तो न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी रहेगी और न ही मजदूरी बढ़ोतरी की।

उन्होंने कहा कि फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी, जिससे मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत कमजोर होगी और वे बिना न्यूनतम मजदूरी के काम करने को मजबूर होंगे।

ग्राम पंचायतों से अधिकार छीनकर ठेकेदारों को सौंपे जा रहे काम

विमल सुराना ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत गांव के विकास से जुड़े कार्यों की योजना और अनुशंसा ग्राम पंचायत और ग्राम सभा द्वारा की जाती थी। ठेकेदारों पर प्रतिबंध था और स्थानीय मनरेगा मेट्स के माध्यम से मजदूरों को रोजगार मिलता था।

लेकिन अब मोदी सरकार के नए बदलावों के बाद सभी फैसले दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिए लिए जाएंगे। ग्राम पंचायतें केवल आदेश पालन करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएंगी। विकास कार्य ठेकेदारों को सौंपे जाएंगे और मजदूर केवल लेबर सप्लाई बनकर रह जाएंगे।

राज्य सरकारों पर बढ़ाया जा रहा आर्थिक बोझ

कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, जिससे राज्य सरकारें बिना दबाव के काम उपलब्ध करा पाती थीं। लेकिन अब मोदी सरकार ने मजदूरी का 40 प्रतिशत भार राज्यों पर डाल दिया है, जिससे राज्य सरकारें काम देने से बच सकती हैं।

20 वर्षों से मजदूरों की जीवनरेखा रही है मनरेगा

विमल सुराना ने कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से देश के करोड़ों मजदूरों की जीवनरेखा रही है। इस योजना के तहत देशभर में लगभग 10 करोड़ परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है, जिनमें तालाब, ग्रामीण सड़कें और जल संरचनाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कैग ऑडिट सहित 200 से अधिक अध्ययनों ने यह सिद्ध किया है कि मनरेगा देश की सबसे प्रभावी और सफल योजनाओं में से एक है।

डिजिटल सत्यापन से 2 करोड़ मजदूर काम से वंचित

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप और आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) को अनिवार्य करने से लगभग 2 करोड़ मजदूरों से काम और मजदूरी का अधिकार छिन गया है

उन्होंने कहा कि भुगतान में लगातार देरी के कारण हर साल मनरेगा बजट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा पुराने बकाये चुकाने में ही चला जाता है।

‘125 दिन रोजगार’ केवल जुमला — सुराना

विमल सुराना ने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार ने काम के कानूनी अधिकार को ही समाप्त कर दिया है, जो मजदूरों के लिए अंतिम सुरक्षा कवच था। ऐसे में ‘125 दिन रोजगार’ केवल एक जुमला है और सरकार की मंशा मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की है।

नए कानून से बढ़ेगी बेरोजगारी और पलायन

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि नए कानूनों के कारण—

  • बेरोजगारी में वृद्धि होगी
  • न्यूनतम मजदूरी के बिना श्रमिकों का शोषण होगा
  • ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा
  • पंचायतों की शक्तियां, अधिकार और प्रासंगिकता समाप्त हो जाएगी

कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें

प्रेस वार्ता के माध्यम से विमल सुराना ने भाजपा और मोदी सरकार से चार प्रमुख मांगें रखीं—

  1. काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी
  2. मनरेगा में किए गए सभी बदलावों की तत्काल वापसी
  3. काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली
  4. न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग

प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता मौजूद

प्रेस वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर के अध्यक्ष लालू राठौर सहित शंकर कुडियम, नीना रावतिया, सोनू पोटाम, कमलेश कारम, ज्योति कुमार, सुखदेव नाग, मनोज अवलम, रमेश यालम, कलाम खान, सुनील उद्दे, जितेंद्र हेमला, संजना चौहान, एजाज अहमद सिद्दीकी, कामेश मोरला, बबीता झाड़ी, इद्रिश खान, नेहरू बघेल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।