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दो दिवसीय बस्तर प्रवास में ‘उल्लास’ साक्षरता केंद्रों का किया मूल्यांकन

स्थानीय संस्कृति और नवाचार देखकर गदगद हुई एनसीईआरटी की टीम

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली की उच्च स्तरीय टीम ने दो दिवसीय बस्तर संभाग प्रवास के दौरान सुकमा जिले के विभिन्न ‘उल्लास’ साक्षरता केंद्रों का गहन निरीक्षण किया। 08 एवं 09 जनवरी को आयोजित इस मूल्यांकन दौरे के दौरान टीम ने जिले में संचालित साक्षरता अभियानों की जमीनी हकीकत को नजदीक से समझा और बस्तर संभाग के लिए एक विशेष शैक्षणिक कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव एकत्र किए।

इस दौरान एनसीईआरटी टीम ने नवसाक्षरों, साक्षरदूतों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय अधिकारियों से सीधा संवाद कर अभियान की प्रगति, चुनौतियों और उपलब्धियों पर विस्तृत चर्चा की। टीम ने स्थानीय संस्कृति के अनुरूप अपनाए गए नवाचारों और शिक्षण पद्धतियों की सराहना करते हुए इन्हें अन्य आदिवासी अंचलों के लिए भी अनुकरणीय बताया।

प्रशासनिक प्रयासों की खुलकर सराहना

एनसीईआरटी टीम में शामिल टाटा कंसल्टेंसी के श्री किशन गोपाल लड्ढा, श्री उमेन्द्र कटरे एवं एनएसडीसी के प्रतिनिधियों ने सुकमा जिले में साक्षरता के प्रति प्रशासन की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की। टीम ने कहा कि कलेक्टर श्री अमित कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के नेतृत्व में शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास न केवल बस्तर बल्कि देश के अन्य पिछड़े क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यधारा में लौटे लोगों की सतत शिक्षा पर जोर

दौरे के दौरान विकासखंड छिंदगढ़ के हमीरगढ़, कुकानार, महिमा, पाकेला तथा सुकमा विकासखंड के पुनर्वास केंद्र मुरतोण्डा का निरीक्षण किया गया। टीम ने पुनर्वास केंद्र में मुख्यधारा में लौटे नवसाक्षरों से संवाद करते हुए ‘सतत शिक्षा’ की आवश्यकता पर विशेष बल दिया, ताकि वे साक्षरता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

जिला जेल में ‘साक्षरदूत’ मॉडल ने किया प्रभावित

एनसीईआरटी टीम ने जिला जेल में संचालित ‘उल्लास’ साक्षरता केंद्र का भी निरीक्षण किया। यहाँ ‘साक्षरदूतों’ द्वारा बंदियों को शिक्षित करने के प्रयासों और कक्षाओं की प्रभावशीलता देखकर विशेषज्ञ खासे प्रभावित हुए। इस पहल के लिए टीम ने जेल अधीक्षक श्री राजेश बिसेन के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सुधारात्मक शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

बस्तर संभाग के लिए बनेगी विशेष शैक्षणिक रणनीति

एनसीईआरटी टीम के दौरे का मुख्य उद्देश्य महापरीक्षा अभियान में उत्तीर्ण नवसाक्षरों से फीडबैक प्राप्त करना तथा उनके अनुभवों के आधार पर बस्तर संभाग के लिए एक विशिष्ट और व्यवहारिक शैक्षणिक मॉडल विकसित करना है, जिससे साक्षरता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी, जिला परियोजना अधिकारी उमाशंकर तिवारी, पीपीआईए फेलो सुश्री अर्कजा कुटियाला, नोडल अधिकारी अगस्टिन कुमार राम, सहित सभी विकासखंडों के बीआरसी, बीपीओ, संकुल समन्वयक, साक्षरदूत एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।