क्षेत्र में कारपोरेशन वन विकास निगम एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा कानून और निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए मनमानी कार्रवाई की जा रही है, जिससे आमजन मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। 
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में कारपोरेशन वन विभाग निगम के अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना, बिना पंचनामा तैयार किए और बिना वैधानिक आदेश के एक निर्माणाधीन मकान को तोड़ने के उद्देश्य से जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचे। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारी-कर्मचारी लाठी-डंडों के साथ पहुंचे, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।
ग्रामीणों का कहना है कि मकान में लगे चौखट और फाटक, जो संबलपुर फर्नीचर मार्ट से विधिवत खरीदे गए थे, उन्हें जबरन जप्त कर लिया गया। ग्रामीणों के अनुसार उक्त सामग्री के बिल भी उपलब्ध हैं, इसके बावजूद बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए सामान जब्त कर लिया गया, जो पूरी तरह से अवैध और अन्यायपूर्ण है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बीट क्रमांक P-875 एवं P-876 क्षेत्र में ‘थिनिंग’ (Thinning) के नाम पर वन विभाग के माध्यम से अंधाधुंध सागौन लकड़ी की कटाई करवाई गई है। इस कटाई को लेकर ग्रामीणों में पहले से ही असंतोष था। ग्रामीणों द्वारा इस विषय में जंगल जांच की मांग करते हुए जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि इस शिकायत से बौखलाए वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा दबाव बनाने और बदले की भावना से निर्माणाधीन मकान को तोड़ने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से प्रतिशोधात्मक है और इसका उद्देश्य ग्रामीणों को डराना तथा उनकी आवाज को दबाना है।

ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि क्षेत्र में पदस्थ महिला बीटगार्ड का व्यवहार भी नियमों के विपरीत है। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने नियम और कानून की बात की, तो महिला बीटगार्ड द्वारा आपत्तिजनक और धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया गया। ग्रामीणों के अनुसार कथित तौर पर कहा गया कि “मैं महिला हूं, तुझे कैसे फंसाना है मुझे अच्छी तरह से पता है”, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, बिना पंचनामा की गई कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षेत्र में पदस्थ महिला बीटगार्ड को तत्काल हटाने की भी मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया, तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे जंगल और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।













