कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से किसान महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायी एक्सपोज़र विज़िट कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कोंटा विकासखंड एवं तोंगपाल क्षेत्र की 9 किसान महिलाओं ने आधुनिक आजीविका मॉडलों, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता के नवीन अवसरों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।
इस एक्सपोज़र विज़िट का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना, सफल आजीविका मॉडलों से परिचित कराना तथा उनके आर्थिक सशक्तिकरण के नए मार्ग खोलना था। भ्रमण दल का नेतृत्व पीपीआईए फेलो सुश्री अर्कजा कुठियाला ने किया। दल में कोंटा विकासखंड के ग्राम मुंडापल्ली की सात महिलाएँ — रिंकी, मासे, पूजा, सिंघे, दीपा, सोनी एवं पूजा तथा तोंगपाल क्षेत्र से मनीषा और दास्से शामिल रहीं।

रायपुर में आजीविका मॉडलों का अवलोकन
एक्सपोज़र विज़िट के प्रथम चरण में दल रायपुर पहुँचा, जहाँ सेरीखेड़ी स्थित कम्युनिटी मैनेज्ड ट्रेनिंग सेंटर (सीएमटीसी) का भ्रमण कराया गया। यहाँ स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित एकीकृत बकरी एवं पोल्ट्री फार्म, बेकरी यूनिट, मशरूम उत्पादन इकाई तथा आरओ वाटर प्लांट जैसे सफल आजीविका मॉडलों का अवलोकन किया गया। इन पहलों ने महिलाओं को समूह आधारित उद्यमिता और सतत आय सृजन की संभावनाओं से परिचित कराया।
इसके अतिरिक्त महिलाओं ने नंदनवन जू, जंगल सफारी, बोटिंग, मैग्नेटो मॉल एवं राम मंदिर का भ्रमण भी किया। डीएफओ रायपुर के सहयोग से अत्यधिक भीड़ के बावजूद महिलाओं को जंगल सफारी का विशेष अनुभव प्राप्त हुआ, जिससे उनमें आत्मविश्वास और उत्साह देखने को मिला।
जशपुर में महुआ आधारित नवाचारों से परिचय
एक्सपोज़र विज़िट के अगले चरण में दल जशपुर पहुँचा, जहाँ महुआ के वैज्ञानिक एवं फूड-ग्रेड संग्रहण की उन्नत तकनीकों का अवलोकन कराया गया। नेट के माध्यम से संग्रहण एवं धूल-रहित सुखाने की पद्धति ने महिलाओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। मंथन फूड लैब एवं महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में महुआ से निर्मित विविध मूल्यवर्धित उत्पादों की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही कार्पेट निर्माण इकाई, मशीन संचालित ढेकी तथा सोलर टनल ड्रायर जैसे नवाचारों का अवलोकन कराया गया। इस भ्रमण ने महिलाओं को महुआ आधारित आजीविका, पोषण एवं आय-वृद्धि के व्यापक अवसरों से अवगत कराया, जो भविष्य में सुकमा जिले में वैकल्पिक आजीविका के नए द्वार खोल सकते हैं।

कोटानपानी मॉडल से मिली प्रेरणा
जशपुर जिले के कोटानपानी क्षेत्र में महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा छिंद पत्तों एवं कांस घास से टोकरी एवं आभूषण निर्माण का मॉडल देखा। समूह द्वारा छह वर्षों में 30 लाख रुपये से अधिक का संचयी टर्नओवर अर्जित करना प्रतिभागी महिलाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आत्मविश्वास में वृद्धि
रायपुर एवं जशपुर में आयोजित संवाद सत्रों के दौरान सुकमा की महिलाओं ने गोंडी गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देकर अपनी सांस्कृतिक पहचान साझा की। इससे यह यात्रा केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी सशक्त माध्यम बनी। वापसी के दौरान रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय का भी भ्रमण कराया गया। 
यह एक्सपोज़र विज़िट प्रतिभागी महिलाओं के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं आत्मविश्वास बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ। कार्यक्रम से महिलाओं में उद्यमिता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की नई सोच विकसित हुई, जो आने वाले समय में ग्रामीण विकास को नई दिशा देगी।













