पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सुदूर अंचलों तक पहुँची स्वास्थ्य सेवाएँ
सुकमा जिले के सुदूर एवं घोर नक्सल प्रभावित अंचलों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोंटा में ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (पीएमएसएमए) दिवस का सफल एवं भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर में किस्टाराम, गोलापल्ली एवं जगरगुंडा जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं का अस्पताल तक पहुँचना प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञ सेवाओं से सुसज्जित रहा शिविर
बीएमओ कोंटा डॉ. दीपेश चंद्राकर ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर के दौरान कुल 64 गर्भवती महिलाओं का ओपीडी पंजीकरण किया गया। शिविर में आईडीओ फाउंडेशन के सहयोग से स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिपेका सात्विक ने अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।
विशेष रूप से 35 उच्च जोखिम (हाई रिस्क) गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड परीक्षण किया गया, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति और माताओं के स्वास्थ्य का सटीक आकलन संभव हो सका। जांच के आधार पर महिलाओं को आवश्यक परामर्श एवं बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराई गई।

पोषण और परामर्श पर भी रहा विशेष फोकस
शिविर में जांच के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के पोषण का भी विशेष ध्यान रखा गया। शासन की योजना के अनुरूप सभी महिलाओं को गर्म भोजन एवं अंडा प्रदान किया गया। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा संतुलित आहार, नियमित जांच एवं सुरक्षित प्रसव को लेकर विस्तृत परामर्श दिया गया।
क्या है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख को सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पतालों में आयोजित किया जाता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क रूप से निम्न सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं—
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सभी आवश्यक रक्त जांच एवं अल्ट्रासाउंड
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गर्भ में शिशु की स्थिति की जांच एवं पोषण संबंधी सलाह
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घर से अस्पताल लाने और वापस छोड़ने की नि:शुल्क परिवहन सुविधा
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आवश्यक दवाइयाँ एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण
सुदूर वनांचलों तक पहुँची स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्कान
किस्टाराम, मरईगुड़ा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचना जिला प्रशासन की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस पहल से न केवल सुरक्षित प्रसव की दर में वृद्धि होगी, बल्कि अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।













